असम के संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर महत्वपूर्ण फैसला : सुप्रीम कोर्ट का आदेश- संसदीय सचिव की नियुक्ति असंवैधानिक है छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय सचिवों पर हाईकोर्ट में 31 को सुनवाई

रायपुर | सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार को दिए गए एक फैसले से छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय सचिवों की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। असम में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर कोर्ट ने कहा भारतीय संविधान में संसदीय सचिव नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है, लिहाजा यह असंवैधानिक है। जस्टिस जे चेल्लेमेश्वर, जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की बेंच ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर कड़ी टिप्पणियां की हैं। संसदीय सचिवों की नियुक्ति और उन्हें अतिरिक्त लाभ देने के खिलाफ याचिका लगाई गई थी। चूंकि, सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरे देश पर लागू होता है। इसलिए राज्य में छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय सचिवों पर भी संकट के बादल हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में दो मामले चल रहे हंै। याचिकाएं पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर और एक्टिविस्ट राकेश चौबे लगाई हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस देकर पूछा था कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति संविधान के किन नियमों की तहत की गई। 31 जुलाई को इसकी अंतिम सुनवाई होगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 22 मई 2015 को 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था।
असम के संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर महत्वपूर्ण फैसला
सरकार निश्चिंत : छत्तीसगढ़ सरकार ने इससे पूर्व स्पष्ट किया है कि राज्य में संसदीय सचिव लाभ के पद पर नहीं हैं। सरकार का मानना है कि छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिव केवल संसदीय दाियत्वों के निर्वहन के लिए रखे गए हैं। इसलिए सरकार इनकी नियुक्ति को लेकर निश्चिंत है।
ये हैं छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव......
नाम कहां से विधायक इनके साथ अटैच
मोतीराम चंद्रवंशी पंडरिया मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह
रूपकुमारी चौधरी बसना महिला, बाल विकास मंत्री रमशीला साहू
तोखन साहू लोरमी जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल
अंबेश जांगड़े पामगढ़ स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप
शिवशंकर पैकरा पत्थलगांव स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर
सुनीति राठिया लैलूंगा उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल
लखन देवांगन कटघोरा खाद्यमंत्री पुन्नूलाल मोहिले
लाभचंद बाफना साजा गृहमंत्री राम सेवक पैकरा
राजूसिंह क्षत्रीय तखतपुर पीडब्लूडी मंत्री राजेश मूणत
गोवर्धन सिंह मांझी वृदानवागढ़ उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय
चंपादेवी पावले भरतपुर-सोनहत वन एवं विधि विधायी मंत्री महेश गागड़ा
पं. बंगाल व दिल्ली में मामले
इधर, कोलकाता हाईकोर्ट ने भी मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी द्वारा की गईं संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इन नियुक्तियों के लिए ममता ने 2012 में यह विधेयक पारित किया था। दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई संसदीय सचिवों की नियुक्ति की हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस पर फैसले का सभी संविधान विशेषज्ञों को इंतजार है। दिल्ली का जो भी फैसला होगा, पर पं. बंगाल और असम का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है।